
माला जाप क्यों??
माला जाप क्यों ?
उत्तर👇 :
१. माला से मंत्र का अभ्यास , मनन , चिंतन और जप में सहायक हे
माला , मंत्र और मृत्यु सदेव याद रखनी चाहिए
२. माला तो कर में फिरे जीब फिरे मुख माही
मनी राम चौदिसा फिरे ये तो समिरन नाहीं
३. माला जाप सनातन पधती हे , सनातन के अनुकूल मुक्ति और सनातन के प्रतिकूल बंधन
माला जाप में गिनिति क्यों ?
उत्तर :
१. मनके फेर ते हुए धयान ना फिरे , इसीलिए गिनते हुए माला फेरी जाती हे
२. एक माला शास्त्रोक्त विधि से फेर के लगभग ६४ तीर्थों के पुण्य के फल का शास्त्र ने बताया हे
३. प्रभु के प्रेम में माला के अभ्यास के बाद या साथ में साँसों की माला का अभ्यास भी बताया गया हे,
जो अभ्यास और भागवत कृपा से निरंतर किया जा सकता हे
निवेदन :
१. बुद्धिजीवी लोगों से निवेदन हे की शास्त्रों का खंडन करने से और विपरीत ज्ञान के प्रचार से सनातन धर्म को कोई नुक़सान नहीं होगा अपितु वह व्यक्ति ख़ुद ही अधर्म का उचित फल प्राप्त कर नरकगामी हो सकता हे
सनातन धर्म में बुराइयाँ देखने से अच्छा होगा की व्यक्ति अपने अंदर की कमियों को देख कर सुधारने का प्रयास करे
२. माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर, कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।
अर्थ : कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता, उसके मन की हलचल शांत नहीं होती.
कबीर की भी ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरने से अगर मन नहीं बदल रहा तो , मन के मनके अर्थात साँस की माला का अभ्यास करे|
हनुमान जी की गदा और माला ये समझती हे की शास्त्र और शस्त्र दोनो महतवपूर्ण हे
🙏राम राम 🙏













